Saturday, April 4, 2009

आखिर क्यों लड़ रहे हैं इजरायल और ईरान..

आखिर क्यों लड़ रहे हैं इजरायल और ईरान.. 


  फ़िलहाल इसराइल और ईरान के बीच लड़ाई दो देशों के बीच ही सीमित दिखती है. संयुक्त राष्ट्र में और अन्य जगहों पर व्यापक रूप से दोनों से संयम बरतने की अपील की जा रही है.

हालांकि दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमला करना जारी रखा है और इसराइल ने लगातार दूसरे दिन भी ईरान पर हवाई हमले करने के दावे किए हैं.

लेकिन क्या होगा अगर संयम की अपीलों पर दोनों देश ध्यान नहीं देते हैं? तब क्या होगा अगर लड़ाई और भड़कती है, और फैलती है?

यहां चंद संभावित सबसे ख़राब हालात के बारे में अनुमानों पर चर्चा की गई है

अगर इस जंग में अमेरिका कूदता है तो.. ?

अमेरिका के तमाम खंडनों के बावजूद ईरान स्पष्ट रूप से मानता है कि इसमें अमेरिकी बलों की भूमिका है और कम से कम उसने इसराइली हमलों में मदद की है.

ईरान पूरे पश्चिम एशिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमला बोल सकता है, जैसे कि इराक़ में स्पेशल फ़ोर्सेज, खाड़ी में सैन्य अड्डे और इस क्षेत्र में मौजूद राजनयिक मिशनों पर.

हमास और हिज़्बुल्लाह जैसे ईरान के प्रॉक्सी बलों की ताक़त बहुत कुछ कम हो चुकी है लेकिन इराक़ में इसके समर्थक मिलिशिया अभी भी हथियारबंद हैं और एकजुट हैं.

अमेरिका को डर है कि ऐसे हमले हो सकते हैं और इसी वजह से उसने अपने कुछ सैनिकों को वापस बुला लिया है.

सार्वजनिक रूप से अमेरिका ने ईरान को अमेरिकी ठिकानों पर किसी तरह के हमले की स्थिति में नतीजे भुगतने की कड़ी चेतावनी दी है.

उन हालात में क्या होगा अगर अमेरिकी नागरिक मारे जाते हैं, जैसे कि तेल अवीव या कहीं और?

ऐसी स्थिति में डोनाल्ड ट्रंप ख़ुद को कार्रवाई करने के लिए मजबूर पा सकते हैं.

इसराइल के प्रधानमंत्री बिन्यामिन नेतन्याहू पर लंबे समय से आरोप लगता रहा है कि वो ईरान को हराने की लड़ाई में अमेरिका को घसीटना चाहते हैं.

सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के पास ऐसे बमवर्षक विमान और बंकर बस्टर बम हैं जो बहुत गहराई में मौजूद ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों तक पहुंच सकते हैं, ख़ासकर फ़ॉरदाओ में.

ट्रंप ने मागा (मेक अमेरिका ग्रेट अगेन) के प्रशंसक वोटरों से वादा किया है कि वह पश्चिम एशिया में कथित तौर पर 'अनंतकाल तक चलने वाले किसी युद्ध' की शुरुआत नहीं करेंगे.

लेकिन दूसरी तरफ़ कई रिपब्लिकन समर्थक... इसराइली सरकार और इसके नज़रिए का समर्थन करते हैं कि तेहरान में सत्ता बदलने का समय आ गया है.

अगर अमेरिका इस जंग में सक्रिय भागीदारी करता है तो इसके साथ ही जंग और भड़केगी और इसके विनाशकारी परिणाम की आशंका बढ़ जाएगा

अगर खाड़ी के देश शामिल होते हैं?

अगर ईरान इसराइल के बहुत सुरक्षित सैन्य और अन्य ठिकानों को नुक़सान पहुंचाने में नाकामयाब रहता है, तो जैसा कि वह करता है वह खाड़ी में अन्य आसान लक्ष्यों पर अपने मिसाइल इस्तेमाल करेगा. ख़ासकर उन देशों के ख़िलाफ़ जिनके बारे में उसका मानना है कि वो उसके दुश्मनों को मदद और प्रोत्साहन देता है.

इस इलाक़े में बहुत सारे ऊर्जा और आधारभूत ढांचे वाले टार्गेट हैं.

ये याद रखना होगा कि ईरान पर आरोप लगा था कि 2019 में उसने सऊदी अरब के तेल क्षेत्र को निशाना बनाया था और इसके हूती प्रॉक्सी बल ने 2022 में यूएई के ठिकानों पर हमला किया था.

हालांकि इसके बाद से इस क्षेत्र के कुछ देशों के बीच ईरान ने रिश्ते सुधारे हैं.

लेकिन ये देश अमेरिकी एयरबेस की मेज़बानी करते हैं. कुछ ने तो पिछले साल गुपचुप तरीक़े से ईरानी मिसाइल हमलों से इसराइल की रक्षा करने में भूमिका निभाई थी.

अगर खाड़ी देशों पर हमला हुआ, तो वे अपनी और इसराइल की सुरक्षा के लिए अमेरिकी लड़ाकू विमानों की मांग कर सकते हैं.

अगर इसराइल ईरान की परमाणु क्षमता नष्ट करने में विफल रहता है?

तब क्या होगा जब इसराइली हमले विफल रहते हैं? अगर ईरान के परमाणु प्रतिष्ठान ज़मीन के बहुत अंदर हुए, बहुत सुरक्षित हुए तब क्या होगा?

ईरान के पास 400 किलोग्राम तक 60% एनरिच्ड यूरेनियम होने का अनुमान है जो कि दस या इससे ज़्यादा परमाणु बम बनाने के लिए पर्याप्त है और ईरान हथियार के स्तर का यूरेनियम बनाने से चंद क़दम ही दूर है, अगर इसे नष्ट नहीं किया जा सका तब क्या होगा?

माना जाता है कि यह गोपनीय खदानों में कहीं गहरे छिपाकर रखे गए हैं. भले ही इसराइल ने कुछ परमाणु वैज्ञानिकों को मार दिया हो लेकिन कोई भी बम ईरान की जानकारी और विशेषज्ञता को नष्ट नहीं कर सकता.

क्या होगा अगर इसराइल के हमले ईरान के नेतृत्व को सोचने के लिए मजबूर कर दें कि आगे और हमलों को रोकने के लिए जितनी जल्दी हो सके उतनी जल्दी परमाणु हथियार बना लेना चाहिए?

और तब क्या होगा जब नए सैन्य नेता अपने मृत पूर्ववर्तियों के मुक़ाबले अधिक अड़ियल और कम सतर्क हों?

कम से कम, यह इसराइल को और हमले करने के लिए मजबूर करता है, जिससे इस क्षेत्र में लगातार हमले और जवाबी हमले जारी रह सकते हैं.

इस रणनीति के लिए इसराइलियों के शब्दकोश में एक क्रूर शब्दावली हैः वे इसे 'घास साफ़ करना' कहते हैं.